राष्ट्रीय मुख्य योजनाएं ही ग्रामीण क्षेत्रों के वास्तविक व सतत विकास का मुख्य आधार


परमाणु सहेली डॉ. नीलम गोयल

प्रिन्सिपल नीलेश संजालिया की अध्यक्षता में भारत की परमाणु सहेली डॉ. नीलम गोयल ने राजकोट के मोदी सीनियर सैकण्डरी स्कूल में एक सेमीनार का आयोजन किया।

डॉ, नीलम ने अपने पीपीटी व वीडियो प्रजेंटेशन के माध्यम से बताया कि किसी भी देश, राज्य या क्षेत्र की आवाम सच्चे व सतत विकास की राह पर चलती रहे इस हेतु उसकी तीन प्रमुख आवश्यकताएं हैं- सतत रूप में जल, बिजली व यातायात की व्यवस्था। इन तीन की व्यवस्थाओं का स्तर ही उस क्षेत्र, राज्य या देश के विकास का स्तर को नापता है। परमाणु सहेली ने विषय को व्यावहारिक धरातल पर स्पष्ट करने के लिए भारत के सामने चायना का उदाहरण दिया। परमाणु सहेली ने बताया कि वर्ष 2010 में चायना की जनसंख्या 1 अरब 50 करोड़ थी जो घट कर वर्तमान में 1 अरब 37 करोड़ तक रह गई है। भारत की यह जनसंख्या वर्ष 2010 में 1 अरब 20 करोड़ थी जो बढ़ कर वर्तमान में 1 अरब 33 करोड़ हो चुकी है। चायना अपनी 1400 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि से 3 लाख अरब रूपये के बराबर का विकास देता है। जबकि, भारत के पास चायना से ज्यादा 1600 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि होते हुए भी यह कृषि से सालाना 37 हजार अरब रूपये के बराबर का ही उत्पादन दे पाता है। चायना में प्रतिव्यक्ति बिजली उपभोग 5000 यूनिट है, भारत में यह 1000 यूनिट ही है। चायना में नदी-जलाशयों-नहरो, कृषि, बिजली, यातायात व उद्द्योग-धन्धों की उत्कृष्ट योजनाएं समयान्तर्गत क्रियान्वित होती रही हैं, जिसके फलस्वरूप वहाँ की प्रतिव्यक्ति औसत आय 7 लाख रूपये है, जबकि भारत में सभी उत्कृष्ट योजनाओं का विरोध होता रहा है, अतः अभी तक भारत 86500 रूपये की प्रतिव्यक्ति आय पर ही अटका हुआ है। चायना में कुल नौकरी पेशा लोग 10 करोड़ तक हैं, जिनकी सालाना आय 7 लाख रूपये या इससे अधिक है। भारत में केवल 50 लाख ही ऐसी नौकरियों में हैं, जिनमें उनकी सालाना आय 4 लाख रूपये व इससे अधिक है। भारत में सिविल सर्विसेज अधिकारी 45000 हैं, जबकि चायना में 3 लाख व्यक्ति सिविल सर्विसेज में अधिकारी पदों पर हैं। चायना में एक पार्टी साम्यवादी शासनप्रणाली है। भारत में 84 छोटी-बड़ी बहुपार्टीयों वाली प्रजातांत्रिक शासन प्रणाली है। चायना में योजनाओं के समयान्तर्गत क्रियान्वयन एवं फिर विकास में गुणात्मक बढ़ोतरी व सामर्थ्य को देखते हुए चायना की आवाम ने वहाँ के मुख्य शासक को उनके जीवन भर के लिए नियुक्त कर दिया। भारत की जनता अपनी ही योजनाओं का स्वयं विरोध कर समग्र विकास को लीलती रही है और अपने प्रजातांत्रिक शासकों को जिम्मेदार ठहराते हुए उन्हें बार-बार बदलती रही है। परमाणु सहेली ने बताया कि भारत की 86 प्रतिशत आवाम अपनी 1600 लाख हे