मोरबी की आवश्यक विद्द्युत व तापीय ऊष्मा ऊर्जा का बेहत्तर विकल्प है 1000 मेगावाट के परमाणु बिजलीघर


न्यूज सर्विस। मोरबी । दिनांक 25 जुलाई 2019


मोरबी के लॉयंस क्ल्ब के महोत्सव में परमाणु सहेली, डॉ. नीलम गोयल ने बताया कि, भारत में कुल 23 परमाणु बिजलीघर कार्यरत हैं और जन सामान्य से अभी तक एक भी जन इन परमाणु बिजलीघरों की वजह से हताहत नहीं हुआ है। दूसरी ऐसी कोई इंडस्ट्री नहीं है जहाँ जन व माल की हानि न हुई हो। सड़क, रेल और हवाई यातायात में तो आये दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। लेकिन कभी यह आवाज नहीं आती कि इन सुविधाओं को खत्म कर दिया जाय। किन्तु परमाणु बिजलीघर जोकि पूरी तरह स्वच्छ एवं सुरक्षित है और इनसे बनने वाली बिजली देश की नींव को सुदृढ़ करती है, उके विरूद्ध मरने-मारने के विरोध आते हैं। आज भारत में 63,000 मेगावाट परमाणु बिजलीघर की साईट्स निर्धारित हो चुकी हैं, लेकिन परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम एवं परमाणु बिजलीघरों के प्रति अज्ञानताओं की वजह से ये सभी साईट्स मृत प्रायः हैं। 1000 मेगावाट का परमाणु बिजलीघर किसी भी कारण से एक वर्ष भी डिले होता है तो इससे, सालाना, 550 अरब रूपये से लेकर 5500 अरब रूपये के बराबर का समग्र विकास रुका रहता है। यदि अवरोध न होते, अज्ञानता नहीं होती तो आज भारत परमाणु ऊर्जा से ही पर-कैपिटा, सालाना, 3000 यूनिट बिजली का उत्पादन कर रहा रहा होता, जोकि वर्तमान में मात्र 35 यूनिट पर कैपिटा मात्र है । भारत के हर तीसरे गाँव के मध्य एक थोरियम परमाणु बिजलीघर लग रहा होता। परमाणु सहेली ने बताया कि, भविष्य में लगने वाले ये थोरियम पावर प्लांट्स किसी आकर्षक मॉल से कम नहीं होंगे। ये किसी भी भीड़-भाड़ वाले क्षेत्र में भी लगाए जा सकेंगे। इनसे किसी भी प्रकार का कोई खतरा नहीं होगा। लेकिन यह भी तब ही संभव हो पायेगा जब, भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम से अज्ञानता के बादल छंट जाएंगे। परमाणु सहेली ने बताया कि भारत एक लोकतंत्र देश है और इस लोकतंत्र देश में किसी भी ऐसी योजना को सफलतापूर्वक क्रियान्वित करने के लिए इसमें बसने वाली जनता का नैतिक समर्थन आवश्यक होता है।

डॉक्टर नीलम गोयल जिनको भारत की परमाणु सहेली के नाम से भी जाना जाता है, वर्तमान में मोरबी व आस-पास के क्षेत्रों में जन-जागरूकता के कार्यों में संलग्न। नीलम गोयल का कहना है कि, मोर