परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनेगा मोरबी का सच्चा साथी


मोरबी के टाऊन हॉल में जिलाधीश श्री आर जे मकडिया की अध्यक्षता में एक विशिष्ट सेमीनार का आयोजन हुआ।

सेमीनार में वीडियों एवं पीपीटी प्रजेंटेशन के द्वारा परमाणु सहेली ने मोरबी की विद्द्युत व तापीय उष्मा ऊर्जाओं की पूर्ती हेतु 1000 मेगावाट के परमाणु ऊर्जा संयंत्र की स्थापना को एक सर्वोत्तम समाधान बताया। सेमीनार में एसपी डॉ. करन राज वाघेला, एडीशनल जिलाधीश श्री के सी जोशी, अध्यक्ष सिरेमिक दीवार टाईल्स श्री नीलेश जेटपारिया, अध्यक्ष मोरबी सिरेमिक सैनेटरी वेयर श्री किरीट पटेल सहित प्रशासन के 500 अन्य अधिकारी व कर्मचारी सम्मिलित हुए।

परमाणु सहेली ने बताया कि मोरबी के कारोबारियों को वर्तमान में प्रतिदिन 24 लाख यूनिट विद्द्युत ऊर्जा व 65 लाख क्यूबिक मीटर पीएनजी गैस के रूप में तापीय ऊष्मा ऊर्जा की आवश्यकता है।

परमाणु ऊर्जा से इन दोनो ऊर्जाओं की पूर्ती होनी है तो, विद्द्युत ऊर्जा की पूर्ती हेतु 55 मेगावाट व तापीय ऊष्मा की पूर्ती हेतु 850 मेगावाट के परमाणु ऊर्जा संयंत्र की स्थापना की जरूरत होगी। लिहाजा 1000 मेगावाट का एक परमाणु संयंत्र ये दोनो जरूरत को सतत व विश्वसनीय आधार पर पूरी कर सकेगा। परमाणु सहेली ने बताया कि प्रति यूनिट बिजली की कीमत 2.5 रूपये के बराबर की आएगी। इस परमाणु संयंत्र के लिए आवश्यक भूमि मात्र एक चौथाई वर्ग किलोमीटर की ही पर्याप्त होगी। और यह संयंत्र शहर के बीचोंबीच भी लगाया जा सकेगा। इससे किसी भी प्रकार की असुरक्षा या ग्रीन हाऊस गैसों का उत्सर्जन नहीं होगा।

परमाणु सहेली ने सौलर संयंत्र के सन्दर्भ में भी बताया कि इसी आवश्यकता को सौलर पावर प्लांट के मार्फ़त पूरा किया जाता है तो, इसके लिए 4000 मेगावाट के सौलर पावर प्लांट लगाने होंगे और इनकी स्थापना के लिए 256 वर्ग किलोमीटर जमीन की आवश्यकता होगी। सौलर की 25 प्रतिशत क्षमता घटक पर तो इससे भी 2.5 रूपये प्रति यूनिट का खर्चा आएगा। लेकिन मोरबी की इंडस्ट्रीज को सतत रूप में बिजली व तापीय ऊष्मा चाहिए, इसके लिए सौलर संयंत्र में प्रति यूनिट 12 रूपये का खर्चा आएगा। परमाणु सहेली ने बताया कि, भारत में नदियों के अन्तर्सम्बन्ध की योजना के तहत जो नहरें बिछेंगी, उन नहरों पर रूप टॉप सौलर पावर प्लांट्स की भी स्थापना होगी। इससे नहरों से पानी का वाष्पोतसर्जन कम होगा और अलग से भूमि एक्वायर करने की आवश्यकता नहीं होगी। परमाणु सहेली ने बताया कि नर्मदा नदी नहर योजना प्रोजेक्ट में गुजरात राज्य में नहर के ऊपर 750 मीटर लंबा 1 megaavaat kaa सौलर पावर प्लांट लगाया भी जा रहा है।

परमाणु सहेली ने बताया कि परमाणु संयंत्र हर लिहाज में सर्वोत्तम होते हुए भी इनकी स्थापनाओं के मार्ग में हमेशा मरने-मारने के विरोध आते रहे हैं। भारत का 1 लाख 53 हजार मेगावाट का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम मृत प्राय है। इन विरोधों का रुट कारण आम से लेकर ख़ास जन में व्याप्त भ्रांतियां एवं पूर्वाग्रह ही हैं। भारत परमाणु ऊर्जा का सिविल अनुप्रयोगों, जैसेकि- मेडिकल, कृषि व उद्योगधंधान्धों में तथा बिजली बनाने व तापीय उष्मा उत्पादन के क्षेत्र में विश्व स्तर की योग्यता रखता है।

वर्ष 2017 में भारत व जापान के बीच में एक परमाणु संधि भी हुई है, जिसके तहत परमाणु ऊर्जा से बिजली व विद्द्युत उत्पादन में दोनो देश मिल कर कार्य कर सकेंगे।

ज्ञात हो कि, परमाणु सहेली के रणनीतिबद्ध समग्र जागरूकता कार्यक्रमों के परिणाम से तमिलनाडु 1000 मेगावाट के परमाणु संयंत्र के विरोध खत्म हो पाए। 2800-2800 मेगावाट के हरि