औद्योगिक विकास को नई उंचाईयों तक ले जाएगी परमाणु ऊर्जा: डॉ. नीलम गोयल



कठवाड़ा औद्योगिक एसोसिएसन में सेमिनार का आयोजन -

अहमदाबाद, कठवाड़ा औद्योगिक एसोसिएसन के सहयोग से भारत की परमाणु सहेली डॉ. नीलम गोयल द्वारा विद्युत ऊर्जा एवं इसकी उपयोगिता, मुख्य्तया, परमाणु ऊर्जा की प्रासंगिकता, पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में कठवाड़ा एसोसिएसन के पदाधिकारी एवं सभी सदस्य मौजूद थे। परमाणु सहेली डॉ नीलम गोयल द्वारा परमाणु ऊर्जा विषय को समझाया गया। उन्होंने कहा कि उद्योगांे की रीढ़ बिजली ही है और बिना बिजली के तो उद्योगों की कल्पना तक नहीं की जा सकती। 



आज ज्यादातर बिजली कोयले से बनाई जाती है, लेकिन धीरे धीरे कोयला खत्म होने की कगार पर है और आने वाले 20 सालो में कोयला पूर्णतः खत्म हो जायेगा। पानी एवं हवा से हम उतनी बिजली नहीं बना सकते। सूर्य से केवल दिन में ही बिजली बना सकते हैं, रात्रि और बरसात में बिजली नहीं बना सकते। जबकि उद्योगो को चलने के लिए 24 घंटे बिजली की जरूरत है। अत आने वाले भविष्य में उद्योगो को बिजली सम्बन्धी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े इसके लिए आज ही इस विषय के बारे में गंभीरता से सोचना होगा। यदि सीमा से ज्यादा कोयले का आयात करके बिजली बनाने में उपयोग किया जाता है तो यह हमारे ग्लोबल वार्मिंग का मुख्य कारक होगा, जो कि पर्यावरण की दृष्टि से सही कदम नहीं होगा। अतः हमारे पास परमाणु ऊर्जा के रूप में बहुत बड़ी शक्ति है जिससे बहुत ज्यादा मात्र में साफ, सुरक्षित, सस्ती और लगातार बिजली प्राप्त कर सकते हैं। लेकिन परमाणु ऊर्जा से बिजली बनाने के विषय में लोगो में बहुत सारी गलतफहमियाँ हैं, जिसकी वजह से देश का परमाणु बिजली कार्यक्रम रुका हुआ है। इस विषय के बारे में लोगो को सही जानकारी होना बहुत ही जरुरी है, इसके लिए सत्य ज्ञान का प्रसार बहुत जरुरी है ताकि परमाणु बिजलीघरों के प्रति लोगो का विश्वास कायम हो सके और परमाणु बिजलीघर समय पर लग सके। परमाणु सहेली ने बताया कि आज हमारे देश में पूरे विश्व का 75 प्रतिशत थोरियम विद्यमान है जो कि कोयले से 15 गुना ज्यादा है। इसके साथ ही, 25 हजार किलोग्राम कोयला जितनी बिजली बनता है, उतनी बिजली के लिए मात्र 1 किलोग्राम परमाणु ईंधन ही पर्याप्त होगा। परमाणु ऊर्जा से बनने  वाली बिजली पर्यावरण के अ